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कोराेना / राजस्थान में राजकीय कार्यालयों में शट डाउन, परीक्षाएं स्थगित, कोरोना को हराने के लिये घर में रहें-मुख्यमंत्री

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राजस्थान में राजकीय कार्यालयों में शट डाउन, परीक्षाएं स्थगित

कोरोना को हराने के लिए घर में रहें-मुख्यमंत्री

कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा

भारत मंच जयपुर, 19 मार्च। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कोरोना वायरस से लोगों की जीवन रक्षा के लिए कुछ आवश्यक सेवाओं से संबंधित विभागों को छोड़कर प्रदेश के अन्य सभी सरकारी एवं अद्र्ध सरकारी विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, राजकीय निगमों एवं मंडलों में 31 मार्च तक शट डाउन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सभी स्कूलों एवं कॉलेज विद्यार्थियों की समस्त परीक्षाओं को आगामी आदेश तक स्थगित करने के भी निर्देश दिए हैं।

श्री गहलोत गुरूवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में कोरोना वायरस से संक्रमण की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस महामारी से बचाव के लिए इटली से सबक लेते हुए सभी माकूल इंतजाम तत्परता के साथ सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस वायरस के फैलाव के लिए अगले दो सप्ताह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, ऎसे में इस बीमारी से जीतने के लिए हर व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी होगी।

बैठक में तय किया गया कि सामान्यतः सभी राजकीय विभागों, निगमों एवं मण्डलों के कार्यालयों में अत्यावश्यक कार्य होने पर ही आगन्तुक आएं।

आवश्यक सेवाओं से जुडे़ इन विभागों में नहीं होगा शट डाउन

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, आयुर्वेद, ऊर्जा, सभी विद्युत निगम, जलदाय, स्वायत्त शासन, नगरीय निकाय, गृह एवं पुलिस, कारागार, गृह रक्षा एवं एफएसएल, वित्त, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, आपदा प्रबंधन एवं सहायता, पंचायतीराज, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, कार्मिक (आवश्यक शाखाएं), परिवहन मय रोडवेज एवं अन्य शहरी बस निगम, जयपुर मेट्रो, सामान्य प्रशासन, स्टेट मोटर गैराज, विधि तथा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में शट डाउन नहीं होगा। शेष विभागों में 50 प्रतिशत कार्मिक कार्यालय में उपस्थिति देंगे तथा 50 प्रतिशत घर से कार्य (वर्क फ्रॉम होम) करेंगे। कार्मिक घर से ऑनलाइन कार्य भी कर सकेंगे।

अवकाश नहीं, मुख्यालय भी नहीं छोड़ सकेंगे कार्मिक

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शट डाउन का मतलब अवकाश नहीं है। कार्मिकों को आवश्यकता होने पर कार्यालय में उपस्थित होना होगा। केवल चिकित्सा कारणों एवं पारिवारिक आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर किसी प्रकार के अवकाश एवं मुख्यालय छोड़ने की अनुमति इस अवधि के दौरान नहीं होगी। सचिवालय में उप सचिव एवं संयुक्त सचिव स्तर तथा इससे उच्च स्तर के अधिकारियों पर, विभागाध्यक्षों के कार्यालयों में उप निदेशक/अधिशासी अभियंता स्तर एवं इससे उच्च स्तर के अधिकारियों पर शट डाउन लागू नहीं होगा। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर कार्यालय एवं जिला स्तरीय अधिकारियों पर भी यह लागू नहीं होगा। जिला स्तरीय अधिकारी अपने कार्यालय में रोटेशन के आधार पर न्यूनतम कर्मियों की उपस्थिति तय करेंगे, जो 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

स्पा, क्लब, बार बंद रहेंगे, निजी फैक्टि्रयों में वर्क फ्रॉम होम हो

श्री गहलोत ने निर्देश दिए कि आगामी आदेश तक प्रदेश में स्पा, क्लब, बार आदि को बंद कर दिया जाए। उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी निजी फैक्टि्रयों को कार्यस्थल पर स्वच्छता एवं कोरोना से बचाव के आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने के लिए पाबंद करें। साथ ही उन्हें यह भी एडवाइजरी जारी की जाए कि फैक्टि्रयों में काम करने वाले श्रमिकों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा तथा सवैतनिक अवकाश दिया जाए।

मनरेगा श्रमिकों को कार्यस्थल पर नहीं बुलाएं, मानदेय का भुगतान होगा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि मनरेगा श्रमिकों को 31 मार्च तक कार्यस्थल पर आने से रोक दिया जाए। इस अवधि में उनके द्वारा रोजगार मांगने पर नियमानुसार मानदेय का भुगतान किया जाएगा।

होम आइसोलेशन की पालना नहीं करने वालों पर करें कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि इस बीमारी से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है कि लोग घर पर ही रहें। जिन व्यक्तियों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए हैं, अगर वे होम आइसोलेशन के निर्देशों की पालना नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 में कार्रवाई की जाए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री रोहित कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में 1100 लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, जिनमें से 265 जयपुर में हैं।

खाटू श्यामजी मंदिर ट्रस्ट की पहल सराहनीय, अन्य ट्रस्ट भी आगे आएं

मुख्यमंत्री ने लोगों का जीवन बचाने के लिए खाटू श्यामजी मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर में फिलहाल दर्शनार्थियों का प्रवेश निषेध किए जाने की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अन्य मंदिर प्रबंध समितियां, ट्रस्ट एवं धर्मगुरू भी ऎसे निर्णय लेकर इस महामारी को रोकने में अपनी भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि आमजन के जीवन की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ जारी रखा जा सकता है, लेकिन दर्शनार्थियों की आवक पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुम्बा देवी, सिद्धि विनायक, शिरड़ी साईं बाबा मंदिर, उज्जैन के महाकाल मंदिर सहित अन्य कई धार्मिक स्थलों पर ट्रस्टों ने स्वयं आगे आकर दर्शनार्थियों के लिए रोक लगाई है। प्रदेश में भी सभी धार्मिक स्थलों पर भी ऎसी पहल हो।

धारा 144 की प्रभावी पालना सुनिश्चित हो

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सरकार ने भीड़ एकत्रित होने से रोकने के लिए धारा 144 लागू की है। जनहित में इसकी प्रभावी पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि वे सरकार द्वारा जारी निर्देशों की पूरी तरह पालना करें ताकि उनका जीवन सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए उठाए जा रहे कदमों की देशभर में सराहना की जा रही है। आमजन भी एक जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करेगा तो हम इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर सकेंगे।

श्री गहलोत ने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों सहित जहां भी सम्भव हो, इस बीमारी की जांच के लिए लैब विकसित किए जाने के प्रयास करें ताकि अधिक से अधिक लोगों को समय पर जांच की सुविधा मिल सके।

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्री भंवरसिंह भाटी, शिक्षा राज्यमंत्री श्री गोविंद सिंह डोटासरा, मुख्य सचिव श्री डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह श्री राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्री निरंजन आर्य, चिकित्सा शिक्षा सचिव श्री वैभव गालरिया, शासन सचिव शिक्षा श्रीमती मंजू राजपाल, शासन सचिव उच्च शिक्षा शुचि शर्मा, शासन सचिव श्रम श्री नीरज के पवन, आयुक्त सूचना एवं जनसम्पर्क श्री महेन्द्र सोनी, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजाबाबू पंवार, एसमएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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