ना बैंड-बाजा और बारात, लॉकडाउन बदली परंपराएं

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  • पांच लोगों के समक्ष सात फेरे, विवाह संपन्न
  • ग्राम पंचायत में 100 पेड़ लगायेंगे नव दंपती
पल्लू क्षेत्र के ढ़ाणी बिजारि‍णियां में शादी के दौरान वरमालाएं पहनाते नव दंपति।

पल्लू. लॉकडाउन ने हर सामाजिक ताने-बाने को कितना बदलकर रख दिया है। इसके लिये सरकारों ने प्रयास किये मगर इतने सफल नहीं कर पाये जितने इस लॉकडाउन ने कर दिये है। फिर चाहे किसी भी प्रकार की गरीब परिवारों की कमर तोडऩे वाले कुप्रथा हो। कोरोना संक्रमण (Covid-19) की रोकथाम के लिये लगाया गया लॉकडाउन सब पर भारी पड़ रहा है।

विडियो स्‍टोरी – Bharat Manch

Hanumangarh Dist Ke पल्लू (Pallu) क्षेत्र के ढ़ाणी बिजारिणयां में रविवार को जसवंत पुत्र मनीराम जाट की शादी का आयोजन किया गया। जिनकी बारात चुरू जिले की सरदारशहर (Sardarshahar) तहसील के गांव ऊडसर में गई थी। इस बारात में खास बात ये थी। आम दिनों में गाजे बाजे के साथ धूम धड़ाम से निकलने वाली बारात में अब लॉकडाउन में सिर्फ तीन लड्डोग ही बारात लेकर वहां के बिरबल जाट की पुत्री द्रोपति घर पहुंचे। वहांं सामाजिक दायित्यों को निभाते हुए उचित दूरी के साथ पंडित जी ने सात फेरे लगवाये और हो गया विवाह संपन्न।

ना कोई सुमटणी, ना मीठे पकवान और ना ही बारातियों के लिये सजा पार्टी वाला टैंट। वहां आम दिनों में उपयोग में लिया जाने वाला रूटिन भोजन ही इस अनुकरणिय पलों का साक्षी बना। इस शादी के बाद नव दंपती को आर्शीवाद देकर वहां से विदा किया गया। नव दंपति ने फैसला किया है कि वो दोनों ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थानों पर 100 पेड़ पौधे (Tree) लगायेगें। ताकि उनकी शादी को यादगार बनाया जा सके।

जिला परिषद सदस्य गोरीशंकर थोरी ने बताया कि लॉकडाउन से सीख लेने की जरूरत है। अनावश्यक खर्चों से समाज में बढ़ती खींचतान को कम करने के लिये ये बहुत ही अच्छा तरीका है। लॉकडाउन का कानुन भले आम लोगों को परेशान कर रहा हो मगर ये प्राकृतिक जीवन देने में बहुत मददगार साबित हुआ है।

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